सोनू सूद का जीवन परिचय । Sonu Sood jivani in hindi

आज हम महान अभिनेता , सामाजिक कार्यकर्ता ‘सोनू सूद’ के जीवन पर विस्तार से लिख लिख रहे हैं। इस लेख के माध्यम से आप सोनू सूद को व्यक्तिगत रूप से जान पाएंगे। उनके सामाजिक योगदान और व्यक्तित्व से भली-भांति परिचित हो सकेंगे।

यह लेख निजी जानकारी तथा विभिन्न स्रोतों का अध्ययन कर लिखा जा रहा है। किसी प्रकार की भूल मानवीय भूल मानी जाएगी। इस लेख के अध्ययन उपरांत आप सोनू सूद के आरंभिक जीवन से लेकर फिल्मी जगत के लिए संघर्ष और प्रसिद्धि आदि का ज्ञान अर्जन कर सकेंगे।

सोनू सूद की जीवनी

सोनू सूद वर्तमान समय में किसी परिचय का मोहताज नहीं है। उन्होंने अपनी दिलेरी को समाज में प्रस्तुत किया है। जब कोरोना संकट में सरकारी बेबस और लाचार महसूस कर रही थी। तब सोनू सूद ने गरीबों के मसीहा के रूप में सामाजिक कार्य किया। उनको इससे पहले भी सामाजिक कार्यों में निस्वार्थ भाव से सेवा करते देखा गया है।

उनका व्यक्तित्व जिस प्रकार फिल्म दिखाया जाता है , ठीक उसके विपरीत है।

वह बेहद साधारण और शांत प्रवृत्ति के व्यक्ति हैं।

वह प्रसिद्धि के लिए मीडिया और प्रचार से दूर रहते हैं। उनको सामाजिक कार्य करने के लिए किसी भी प्रकार का प्रचार पसंद नहीं करते। फिल्म जगत में इनके सराहनीय योगदान के लिए उन्हें फिल्मफेयर पुरस्कार और विभिन्न प्रकार के पुरस्कारों से नवाजा गया है। इनकी बतौर छवि एक विवाह ऐसा में भी देखने को मिलता है।

उनकी सादगी इस फिल्म में बेहतरीन ढंग से देखी जा सकती है।

नाम सोनू सूद
जन्म 30 जुलाई 1973
स्थान मोगा पंजाब
माता का नाम सरोज सूद ( प्रोफ़ेसर )
पिता का नाम शक्ति सूद
धर्म हिंदुत्व
पत्नी का नाम सोनाली (25/09/1996)
पुत्र तथा पुत्री ईशान सूद , आयान सूद
शिक्षा इलेक्ट्रॉनिक इंजिनियर B.sc , मॉडलिंग
व्यवसाय अभिनेता , समाजसेवी , (पारिवारिक गारमेंट का व्यवसाय)
रूचि का क्षेत्र जिम , योग , खेल , संगीत , समाज सेवा , पुस्तक अध्ययन।

आरम्भिक जीवन

सोनू सूद का आरंभिक जीवन पंजाब के मोगा शहर में हुआ। यहां उन्होंने आरंभिक शिक्षा ली , उनका परिवार यही पंजाब में रहता था। इसलिए उन्होंने अपना आरंभिक जीवन इसी शहर में बिताया। उन्हें बचपन से ही एक प्रसिद्ध हीरो बनने का ख्वाब था। वह दिलीप कुमार तथा राजेश खन्ना , जैकी चैन के प्रशंसकों में से एक थे।

उन्हें भी ऐसी अदाकारी करनी थी जिसके लिए लोग उन्हें याद करें।

उच्च शिक्षा के लिए वह नागपुर आ गए , यहीं से उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत की। मॉडलिंग की शिक्षा यहां के विश्वविद्यालय से प्राप्त की। जिसके बाद उन्होंने मॉडलिंग तथा फिल्म के विभिन्न अंगों में अपने किस्मत को आजमाया।

 

शिक्षा

सोनू सूद आम विद्यार्थियों के समान थे। आरंभिक शिक्षा पंजाब के मोगा शहर से ही प्राप्त किया। साथ में वह अपने पारिवारिक व्यवसाय मैं भी हाथ बटाते थे। उनके पिताजी कपड़ों का व्यवसाय करते थे। सोनू सूद अपने पिता के व्यवसाय में हाथ बटाते थे। अपनी शिक्षा भी साथ में जारी प्राप्त कर रहे थे ।

माता पेशे से प्रोफेसर थी। सोनू सूद की पढ़ाई के विषय में वह काफी चिंतित रहती थी। वह नहीं चाहती थी कि उनका बेटा कपड़ों के व्यवसाय में लगा रहे। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने इंजीनियरिंग कॉलेज में दाखिला करवाया। वहां सोनू सूद ने इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर में स्नातक की डिग्री हासिल की।

सोनू सूद बचपन से ही फिल्म जगत में अपने किस्मत को आजमाना चाहते थे। शिक्षा उन्होंने प्राप्त की किंतु परिवार के कहने से उनका इस क्षेत्र में अधिक रुचि नहीं था। हिम्मत करके उन्होंने परिवार से दो साल का समय मांगा।  फिल्म जगत में किस्मत आजमाने के लिए मुंबई चले गए।

मॉडलिंग के क्षेत्र में उन्होंने कई प्रतिस्पर्धा में भाग लिया। नागपुर से उन्होंने मॉडलिंग के क्षेत्र में अध्ययन किया। जिसके बाद उन्हें 1999 में तमिल फिल्म में अभिनय का मौका मिला ।

 

फिल्म जगत में आने से पूर्व संघर्ष

सोनू सूद बचपन से अपने पिता के व्यवसाय में लगे थे। पढ़ाई के लिए उन्हें इंजीनियर कॉलेज में दाखिला कराया गया।  यहां से उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर की डिग्री हासिल की। किंतु इस क्षेत्र में उनकी अधिक रूचि नहीं थी। उन्होंने अपनी किस्मत आजमाने के लिए मुंबई का रुख किया। वहां लगभग  दो साल समय व्यतीत किया।  उन्होंने काफी कड़ा संघर्ष किया फिर भी कोई निष्कर्ष ना मिल सका। अनेकों प्लेटफार्म पर उन्होंने परफॉर्म किया , किंतु उन्हें बड़ा मौका नहीं मिल सका।

सोनू सूद को विज्ञापन के रूप में पहला मौका मिला था।

उन्हें जूतों का विज्ञापन करना था जो तीन दिन का काम था।  इसके लिए उन्हें ₹3000 प्रतिदिन के हिसाब से मिलना तय हुआ था। उनके पास कोई काम नहीं था , उन्होंने इस विज्ञापन के लिए हां भर दी।  जब वह स्टूडियो पहुंचे वहां उनके जैसे ढेर सारे कलाकार मौजूद थे। उन्होंने एक कोने में खड़े होकर उस विज्ञापन में ड्रम बजाया था। उनका मन काफी परेशान हुआ क्योंकि वह इस काम के लिए मुंबई नहीं आए थे।

मॉडलिंग , विज्ञापन आदि के क्षेत्र में भी किस्मत आजमाया। 

किंतु काफी छोटा काम मिलता था , जो उनके मन मुताबिक नहीं था। लगभग दो साल मुंबई की सड़कों को जानने में ही लग गया। वह अपने जीवन से निराश हो रहे थे। उन्होंने अपने इंटरव्यू और वीडियो कितने ही जगह दिए थे किंतु कोई भी उनके अभिनय की सराहना नहीं कर रहे थे।

तभी उन्हें किसी ने बताया तमिल भाषा में उन्हें मौका मिल सकता है।

उनकी वीडियो को देखा गया और तमिल फिल्म में काम करने के लिए उन्हें बुलाया गया। वह साधारण ट्रेन से चैन्नई दक्षिण भारत के लिए रवाना हुए और पहली फिल्म के लिए हस्ताक्षर किया।

यह पहला मौका उनके जीवन को बदलने में सक्षम रहा।

यहां से उन्होंने अपनी पहचान फिल्म जगत में कायम की।

दिन – प्रतिदिन उनकी ख्याति बढ़ती गई।

हिंदी सिनेमा में उनकी पहली फिल्म शहीद-ए-आजम थी। जिसके बाद वह देश में काफी प्रसिद्ध हो चुके थे , उनकी प्रसिद्धि आज जगजाहिर है।

फिल्म जगत में आगमन

सोनू सूद ने नागपुर से मॉडलिंग और अभिनय की शिक्षा प्राप्त की। इसके उपरांत वह फिल्म जगत में आए। बतौर अभिनेता उनकी पहली फिल्म वर्ष 1999 कालजघार थी। यह फिल्म तमिल भाषा में थी जिसमें सौम्या नारायण पादरी की भूमिका सोनू सूद ने निभाई थी। उसके उपरांत वह निरंतर तमिल और तेलुगू तथा कन्नड़ भाषा के फिल्मों में अभिनय करने लगे।

हिंदी भाषा में उनकी पहली फिल्म शहीद-ए-आजम थी जिसमें शहीद भगत सिंह की भूमिका में वह नजर आए। सोनू सूद ने तमिल , तेलुगू , कन्नड़ , पंजाबी , हिंदी , और यहां तक कि हॉलीवुड फिल्मों में भी काम किया है। उनकी वर्ष 2009 में आई सिटी ऑफ लाइफ हॉलीवुड की मूवी थे।

जिसमें उन्होंने बसु पीटर पटेल के रोल में थे।

सोनू सूद की अदाकारी को लोग काफी प्रशंसा करते हैं। वह मुख्य तौर पर फिल्मों में विलेन के रोल में होते हैं।  किंतु उनकी प्रसिद्धि किसी नायक से कम नहीं होती है।

उन्होंने नायक की भूमिका में भी सफल अभिनय किया है।

वर्तमान समय में वह नायक और खलनायक दोनों की भूमिका में फिल्मों को करते हैं।

फिल्म के क्षेत्र में उन्हें फिल्म फेयर पुरस्कार तथा आई आई एफ ए का पुरस्कार भी मिल चुका है। उनके कैरियर की शुरुआत 1999 से आज तक निरंतर जारी है।

बेहतरीन फिल्म

सोनू सूद ने तमिल , तेलुगू , कन्नड़ , हिंदी , पंजाबी और अंग्रेजी की बेहतरीन फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया है। उनकी पहली मूवी वर्ष 1999 में आई थी। उसके बाद से उन्होंने निरंतर एक के बाद एक फिल्मों में काम किया। वह मॉडलिंग के क्षेत्र में भी प्रतिस्पर्धी रहे। उनकी कुछ प्रमुख फिल्में हैं जिनके लिए उन्हें काफी लोकप्रियता मिली।

वर्ष 2002 में शहीद-ए-आजम फिल्म आई थी जिसमें वह शहीद भगत सिंह के भूमिका में थे।

इसके कारण उन्हें हिंदी सिनेमा में एक श्रेष्ठ अभिनेता के रूप में स्थापित किया।

पंजाबी फिल्म जिंदगी खूबसूरत है से उन्हें पंजाबी भाषा जानने वालों में अपनी पहचान बनाने में कामयाब रहे। वर्ष 2004 में आई फिल्म युवा में वह गोपाल सिंह की भूमिका में नजर आए। वर्ष 2005 में आशिक बनाया आपने फिल्म मैं उन्होंने करण की भूमिका निभाई।  जो इमरान हाशमी का दोस्त होता है। इस फिल्म ने हिंदी सिनेमा जगत में काफी दिनों तक अपना जलवा दिखाया।

इस फिल्म के गाने आज भी सुने जाते हैं।

जोधा अकबर फिल्म 2008 में आई जिसमें सुजामल थे , जिसकी बहन जोधा थी।

अकबर के विपरीत इन्होंने अदाकारी की और मुगल शासन व्यवस्था को प्रदर्शित करने में या फिल्म कामयाब रहे।

2009 अरुंधति यह तेलुगू भाषा की फिल्म थी। जिसमें पशुपति के रूप में इन्होंने खलनायक की भूमिका निभाई थी। इससे इनकी प्रसिद्धि और बढ़ गई इन्होंने देश ही नहीं विदेशों में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई थी। इसके लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ खलनायक का अवार्ड मिला।

कई भाषाओं में इन्हें इस फिल्म के लिए अवार्ड दिया गया।

2009 सिटी ऑफ लाइफ जो हॉलीवुड की एक फिल्म थी। उसमें पीटर पटेल के नाम से अभिनय किया।

इस मूवी से उन्होंने हॉलीवुड में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

वर्ष 2010 में बनी फिल्म दबंग में छेदी सिंह के रूप में यह नजर आए।

इस फिल्म में उन्होंने सर्वश्रेष्ठ अभिनय किया। यह मुख्य रूप से खलनायक की भूमिका थे जिसके लिए उन्हें विभिन्न स्तर पर पुरस्कार दिए गए।

2013 में बनी फिल्म रमैया वस्ता मैया में वह रघुवीर के रोल में थे  जिसकी बहन थी। बहन की परवरिश और विवाह आदि कड़े संरक्षण में किया था।  इसके लिए सोनू सूद को बेहद सराहना मिली।  इस फिल्म के गाने काफी सुपरहिट हुए थे। उनकी सादगी और उनके सरल स्वभाव को वर्ष 2008 में बनी फिल्म एक विवाह ऐसा भी में देखा जा सकता है।

यह फिल्म विवाह की सेकंड कॉपी मानी जाती है।

 

अलग-अलग भाषाओं में फिल्म करने का राज

सोनू सूद पंजाबी और हिंदी बेहतरीन तरीके से जानते थे। इंग्लिश का भी उन्हें अधिक ज्ञान था , उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स में इंजीनियर किया था। किंतु उन्हें तेलुगू , तमिल , कन्नड़ आदि भाषाओं का ज्ञान नहीं था।

इसके लिए उनकी माताजी ने हिंदी से अन्य भाषाओं में ट्रांसलेट की किताब उन्हें दी थी।

वह बताते हैं जब वह दक्षिण भारत के लिए पहली फिल्म में काम करने रवाना हुए थे।

वह रास्ते में उस किताब का अध्ययन करते हुए जा रहे थे। जैसे पानी को क्या कहते हैं ? सड़क को क्या कहते हैं आदि। अनेक शब्दों का ट्रांसलेशन उस किताब में था। उन्हें किताब पढ़कर और डायरेक्टर तथा अन्य लोगों से बात करके उस भाषा का ज्ञान हुआ। वह अपने दिए हुए डायलॉग को हर समय रखा करते थे।

उसका हिंदी तथा इंग्लिश में लिखकर अध्ययन करते।

वह नहाते , खाना खाते अथवा किसी भी कार्य को करते समय आपने डायलॉग को सदैव याद करते रहते दोहराते रहते।

यही कारण है उनके उस समय बोलेगा डायलॉग आज भी उनको मुंह जवानी याद है।

 

प्रमुख पुरस्कार

  • 2008 – जोधा अकबर फिल्म फेयर श्रेष्ठ सहायक अभिनेता पुरस्कार
  • 2009 अरुंधति सर्वश्रेष्ठ खलनायक नंदी अवार्ड , सहायक अभिनेता का फिल्म फेयर अवॉर्ड तेलुगू में
  • 2010 दबंग खलनायक के अभिनय के लिए अप्सरा अवार्ड , आई आई एफ ए सर्वश्रेष्ठ खलनायक पुरस्कार।
  • 2012 जुलाई फिल्म के लिए खलनायक की भूमिका में एसआईआईएमए अवार्ड। 

 

सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में

सोनू सूद फिल्म जगत में जितने प्रसिद्ध हैं , उतने ही सामाजिक कार्यों में। उनका समाज के प्रति लगाओ , देखते ही बनता है।  वह बिना किसी विज्ञापन और प्रचार के अपने सामाजिक धर्म को निभाते हैं। जैसा कि आप जानते हैं कोरोना वैश्विक महामारी बन कर समाज में काल के रूप में आई है।

सरकार , प्रशासन सभी संकट से निपटने के लिए बेबस और लाचार नजर आए।

विशेष रुप से कमजोर और मजदूर वर्ग इस महामारी का शिकार बना।

इस संकट में यह वर्ग बिल्कुल बेरोजगार और लाचार हो गया था। जो पैसे थे कुछ दिनों में घर बैठे खर्च हो गए।

रोजगार का कोई साधन नहीं , खाने पीने की कोई व्यवस्था नहीं।

यहां तक कि यह अपने घर लौटने में भी बेबस नजर आए।

लोगों ने ट्विटर के माध्यम से सोनू सूद को अपना हाल बताया। सोनू ने स्वयं व्यक्तिगत रूप से कार्य को संभाला।  अपने साथियों के साथ एक टीम बनाकर सभी व्यक्तियों को उनके घर सही सलामत पहुंचाने का बीड़ा उठाया। व्यक्तिगत खर्चे पर सोनू सूद ने सभी को बहुतायत मात्रा में उनके घर पहुंचाने में सफलता हासिल की। सोनू सूद यह किसी प्रचार के लिए नहीं कर रहे थे। उनकी सहायता से जिनका भला हो सका , उन्होंने इस व्यक्ति को सोशल मीडिया पर धन्यवाद किया।

देखते ही देखते सोनू सूद गरीबों के मसीहा बनकर उभरे।

उन्होंने हजारों की संख्या में बसों का प्रबंध किया और लोगों को देश के विभिन्न क्षेत्रों में सही सलामत घर पहुंचाया।

इस जैसा कोई सामाजिक व्यक्ति अगर समाज में एक भी हो तो समाज में दुख तकलीफ का सामना हंसते हुए किया जा सकता है। लोगों ने जहां सरकार और प्रशासन से उम्मीदें हटा ली थी , वही सोनू सूद एक उम्मीद की किरण रूप में प्रकट हुए थे।

 

सोनू सूद का मां के प्रति विशेष लगाव

सोनू सूद का अपनी मां के प्रति विशेष लगाव था। उनकी मां सरोज सूद इंजरिंग कॉलेज में प्रोफेसर थी। सोनू सूद अपनी मां को प्रतिदिन कॉलेज छोड़ने जाते और कॉलेज से लेकर घर आते थे। यह उनका प्रतिदिन का कार्य था। मां भी सोनू को विशेष लगाव करती थी। वह उनके कैरियर को लेकर काफी चिंतित रहती। किंतु विश्वास दिलाती वह जिस भी कार्य को करना चाहता है उसमें धैर्य बनाकर रखें। एक ना एक दिन सफलता अवश्य मिलेगी।

यह मूल मंत्र आज भी सोनू सूद याद रखते हैं।

कॉलेज के दिनों की बात थी , जब सोनू कॉलेज में थे , उनकी मां से प्रतिदिन फोन पर बात हुआ करती थी।  किंतु फिर भी उनकी मां चिट्टियां लिखती।  सोनू अपनी मां को कहते जब हमारी बात प्रतिदिन होती है , तो चिट्ठी लिखने का क्या लाभ।

सोनू जब चिट्ठी लिखने बैठते तो उनसे एक चिट्ठी भी नहीं लिखी जाती थी। उनकी मां यह चिट्ठी लिखकर अपने बेटे को भेजती थी। 1992 से लेकर 2007 तक लगभग माने 2000 पत्र अपने बेटे को लिखे थे।

वह जमा पूंजी के रूप में आज भी सोनू सूद के पास उपलब्ध है।

जब दोनों की फोन पर बात हुआ करती थी , तब मां कहती थी मेरा यह पत्र हम दोनों के बीच की बात का प्रमाण रहेगा। यह फोन कोई प्रमाण नहीं है।

वास्तव में वह चिट्टियां आज सोनू और माँ के बिच बातों का प्रमाण है।

आज भी उन चिट्ठियों को पढ़कर भावुक हो जाते हैं। चिट्ठियों को पढ़कर ऐसा लगता है जैसे मां से साक्षात बात हो रही है।

 

स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता

सोनू सूद व्यक्तिगत रूप से काफी फिट है। उनके सेहत और शारीरिक संरचना के कारण उन्हें मुख्य रूप से खलनायक की भूमिका दी जाती है। सलमान खान के बाद वह दूसरे ऐसे अभिनेता हैं जिनके शरीर को फिल्मों में अधिक दिखाया जाता है। सोनू सूद बताते हैं जब वह चेन्नई तमिल फिल्म के लिए पहली बार गए थे। तब वहां डायरेक्टर ने इनके शरीर को देखकर फिल्म में शामिल किया था।

इनका शरीर खलनायक तथा मुख्य अभिनेता के रूप में सटीक बैठता था।

व्यक्तिगत रूप से यह लोगों को स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित करते हैं।

यही कारण है कि वह प्रतिदिन योगा और जिम करते हैं।

उनके शारीरिक संरचना को देखकर आज युवा पीढ़ी उन्हें अपना आदर्श मानते हैं।  उनके जैसा शरीर बनाने की इच्छा में आज लाखों युवा जिम में अपना पसीना बहाने को तैयार हैं।

स्वच्छ भारत अभियान तथा विभिन्न प्रकार के सोशल मीडिया पर चुनौती को सोनू सूद व्यक्तिगत रूप से स्वीकार करते हैं ,तथा अग्रणी भूमिका निभाते हैं। अच्छा खानपान योग और कसरत को सभी व्यक्तियों के लिए आवश्यक मानते हुए लोगों को जागरूक करते हैं।

उनके स्वास्थ्य के प्रशंसक सलमान खान , शाहरुख खान  ,  जैकी चैन मुख्य रूप से हैं।

वह सोनू सूद को अपना आदर्श मानते हैं। उनसे कड़ी मेहनत करने की प्रेरणा लेते हैं। इन सभी का मानना है सोनू सूद से मेहनत करने की प्रेरणा मिलती है।

जैकी चैन के साथ उन्होंने कुंग फू योगा भी किया है।

सलमान खान और शाहरुख खान के साथ भी उन्होंने अनेकों फिल्म किए हैं।

 

सोनू सूद का फिल्मी सफर

 

वर्ष – फिल्म -भाषा पात्र का नाम – अवार्ड
1999 कल्लजहगर  , तमिल सौम्य नारायण
1999 नेंजिनिले  , तमिल
2000 हैंड्स अप , तेलुगू
2001 मजनू
2002 शहीद ए आजम , हिंदी भगत सिंह
2002 जिंदगी खूबसूरत है , पंजाबी
2002 राजा , तमिल भवानी
2003 अमेलु अबबिलु , तेलुगू
2003 कोविलपट्टी वीरालक्ष्मी , तमिल राजीव माथुर
2003 कहां हो तुम , हिंदी करण
2004 मिशन मुंबई ,हिंदी
2004 युवा , हिंदी गोपाल सिंह
2005 चंद्रमुखी , तमिल उमा यान
2005 सुपर , तेलुगू सोनू
2005 अथाद , तेलुगू माली
2005 आशिक बनाया आपने  , हिंदी करण
2005 सिसकियां , हिंदी डॉ विश्वास
2005 डाइवोर्स , हिंदी

2005 शीशा

सिद्धार्थ जोशी

 

2006 अशोक , तेलुगू के.के
2006 रॉक इन मीरा , अंग्रेजी प्रिंस
2008 जोधा अकबर , हिंदी प्रिंस सुरजा मल फिल्म फेयर अवार्ड
2008 मिस्टर मेधावी , तेलुगू सिद्धार्थ
2008 सिंह इज़ किंग , हिंदी लखन लकी सिंह
2008 एक विवाह ऐसा भी , हिंदी प्रेम अजमेरा
2009 अरुंधति , तेलुगू पशुपति – नंदी अवॉर्ड , फिल्म फेयर अवार्ड

2009 Afterwards

2009 ढूंढते रह जाओगे , हिंदी आर्यन
2009 अंजनैयुलू , तेलुगू बडा
2009 बांगरू बाबू , तेलुगू
2009 एक निरंजन , तेलुगू जॉनी भाई
2009 सिटी ऑफ लाइफ , अंग्रेजी बसु पीटर पटेल
2010 दबंग , हिंदी छेदी सिंह – अप्सरा अवार्ड, आई आई एफ ए पुरस्कार
2011 शक्ति , तेलुगू मुख्तार
2011 तीनमार , तेलुगू सुधीर
2011 बुड्ढा होगा तेरा बाप , हिंदी एसीपी करण मल्होत्रा
2011 कंदिरीगा , तेलुगू भवानी
2011 दूकुडू , तेलुगू नायक
2011 वीर विष्णुवर्धना  , कन्नड़ अधिसेशन
2011 औस्ते , तमिल बॉक्सर डेनियल
2012 मैक्सिमम , हिंदी इंस्पेक्टर प्रताप पंडित
2012 उ कोदथारा ?उल्लिक्की पड़थारा , तेलुगू फणींद्र भूपति
2012 जुलाई , तेलुगू

2012 गब्बर सिंह

बिट्टू – एसआईआईएमए अवार्ड

 

2013 शूटआउट एट वडाला , हिंदी दाऊद इब्राहिम
2013 माधा गजा राजा , तमिल
2013 रमैया वस्ता मैया , हिंदी रघुवीर
2013 कुछ दिन कुछ पल , हिंदी
2013 आर राजकुमार , हिंदी  

 

2014 एंटरटेनमेंट , हिंदी

2014 हैप्पी न्यू ईयर , हिंदी

 

 

 

2015 गब्बर, हिंदी
2016 तूतक तूतक तूतिया , हिंदी
2016 साहसम

2017 कुंग फू योगा , हिंदी

 

 

 

2018 पलटन   , हिंदी

2018 सिंबा , हिंदी

 

 

2019 देवी2
2019 इट्स माय लाइफ
2020 पृथ्वीराज, हिंदी
2020 मुंबई सागा

निष्कर्ष :-

सोनू सूद बेहद साधारण व्यक्ति है , वह अन्य अभिनेताओं के भांति गुरुर नहीं करते।  उन्हें किसी चीज का अहंकार नहीं है। वह जो समाज से ग्रहण करते हैं , वह समाज को ही अर्पित कर देते हैं।  इस भावना से वह दिन-रात कार्य करते हैं।  उनकी सादगी देखते ही बनती है।

आज उनके पास किसी प्रकार की कोई कमी नहीं है। अनेकों गाड़ियां उनके इर्द-गिर्द खड़ी रहती है।  किंतु उनका लगाओ बचपन में पिता के स्कूटर से था, जिसको वह प्यार से चलाया करते थे। अपनी माताजी को कॉलेज उसी स्कूटर से छोड़ने तथा लेने जाते थे। आज भी इतनी बड़ी हस्ती होने के बावजूद वह उसी पुराने स्कूटर पर सवारी करना पसंद करते हैं , क्योंकि उनकी भावनाएं उनसे जुड़ी है।

सोनू सूद की सरलता और सौम्य स्वभाव उन्हें महान बनाता है।

Leave a Comment

You cannot copy content of this page