स्मृति मंधाना जीवन परिचय ( बचपन, करियर, संघर्ष, रिकार्ड्स, कमाई )

इस आर्टिकल में हम स्मृति मंधाना का जीवन परिचय जानेगे। आप इस लेख से अवश्य ही प्रेरित होंगे और जीवन में स्वयं में सही राह प्रदान करेंगे। 

इस दुनिया में कुछ भी करने से पहले हमें खुद पर भरोसा करने की जरूरत होती है। क्योकि यही भरोसा हमें वो कर दिखाने और बनने के लिए आवश्यक हिम्मत प्रदान करता है। जो हम करना अथवा जो हम बनना चाहते है, इस दुनिया में इसे बहुत से विजेता हुए है। जिन्होंने अपने जीवन में चल रहे कठिन हालातो को अपने उपर हावी नही होने दिया और वो कर दिखाया जिसके बारे में दुनिया मात्र कल्पना करती है। इस आर्टिकल में हम एक ऐसी ही महिला खिलाडी के जीवन के बारे में जानेंगे, जिन्होंने कड़ी मेहनत और खुद पर भरोसा करते हुए।

आज वो मुकाम हासिल किया है जहा से आज वो लांखो लोगो को प्रेरित करती है। 

स्मृति मंधाना का बचपन और परिवार

स्मृति मंधाना जिनका पूरा नाम स्मृति श्रीनिवास मंधाना है, इनका जन्म 18 जुलाई सन 1996 को मुंबई में हुआ था, स्मृति का परिवार एक मराठी है। स्मृति के पिता का नाम श्रीनिवास मंधाना तथा उनकी माँ का नाम स्मिता मंधाना है। जब स्मृति की उम्र महज 2 वर्ष थी, तब उनका परिवार सांगली में रहने के लिए शिफ्ट को गया था। वैसे स्मृति के पिता स्पोर्ट्स से जुड़े सामान के डिस्ट्रीब्यूटर थे।

जो स्पोर्ट्स में उपयोग होने वाले सामान को डिस्ट्रीब्यूट करने का काम करते थे। 

वही स्मृति की माँ एक हाउसवाइफ है, हम आपको बता दे की स्मृति के पिता तथा भाई दोनों की सांगली के लिए डिस्ट्रिक्ट लेबल तक क्रिकेट खेल चुके है।

चलिए अब हम स्मृति के शुरुआती जीवन के बारे में जानते है। 

स्मृति मंधाना का शिक्षा तथा शुरुआती जीवन

चूँकि स्मृति के पिता तथा बड़े भाई दोनों की क्रिकेट खेलते थे, इसलिए अपने बड़े भाई को क्रिकेट खेलता देखकर, स्मृति के मन में भी क्रिकेट खेलने का शौक अथवा जूनून जागृत हो उठा था। जब स्मृति मात्र 4 वर्ष की थी। 

तब वे सुबह उठकर अपने भाई से साथ क्रिकेट ग्राउंड जाकर नेट्स के पीछे से अपने भाई को क्रिकेट खेलता हुए देखकर स्मृति के मन में भी क्रिकेट सीखने और खेलने का विचार आया। उन्हें क्रिकेट में अपना करियर बनाने की प्रेरणा अपने बड़े भाई से ही मिली थी। चलिए अब हम स्मृति के संघर्ष पूर्ण जीवन तथा उनके करियर के बारे में जानते है। 

स्मृति मंधाना का क्रिकेट करियर तथा संघर्षपूर्ण जीवन

वैसे शुरुआत में स्मृति दाए हाथ की बल्लेबाज थी, लेकिन बचपन में अपने भाई को बाए हाथ से बल्लेबाजी करते देख कर स्मृति ने भी बाए हाथ से बल्लेबाजी करना शुरू कर दी थी। शुरुआत में स्मृति को उनके भाई ने क्रिकेट खेलना सीखाया। जिसके बाद से स्मृति का क्रिकेट खेलने का शौक एक तरह से जूनून में ही बदल गया था, चूँकि स्मृति अपने खेल को हर दिन बेहतर करती जा रही थी। 

अपने पिता और भाई की देखरेख में स्मृति ने मात्र 9 वर्ष की उम्र में ही महाराष्ट्र की अंडर – 15 महिला क्रिकेट टीम में अपनी जगह बना ली थी। इसके बाद अपने अच्छे प्रदर्शन के दम पर स्मृति ने मात्र 11 से 12 वर्ष की उम्र में महाराष्ट्र की अंडर – 17 और अंडर 19 की की टीम में अपनी जगह बना ली थी। स्मृति की छोटी सी उम्र में यह सभी उपलब्धिया उनकी मेहनत के कारण ही संभव हो सकी थी। 

कुछ तथ्य

  • स्मृति ने 5 अप्रैल, 2013 को बांग्लादेश के विरुद्ध खेलते हुए टी-20 करियर में अपना डेब्यू किया था। 
  • स्मृति ने ODI क्रिकेट में अपना डेब्यू मैच 10 अप्रैल, 2013 को बांग्लादेश के खिलाफ खेलते हुए किया था। 
  • इसके बाद 13 अगस्त साल 2014 को स्मृति ने इंग्लैंड के खिअफ टेस्ट क्रिकेट में अपना डेब्यू किया था। 
  • स्मृति ने अक्टूबर 2013 में महाराष्ट्र की ओर से खेलते हुए गुजरात के खिलाफ 150 गेंदों में 224 रन की जबरदस्त पारी खेली थी। 
  • साल 2016 में स्मृति ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलते हुए अपने करियर का पहला शतक लगाया था। 

हालाँकि स्मृति के क्रिकेट करियर में बहुत से उतार चढ़ाव भी आये थे। लेकिन उन्होंने मेहनत और अपने प्रदर्शन के दम पर वह अपने क्रिकेट करियर को उस उकाम पर ले गयी है। जहा से वो सभी को आगे बढने और अपने देश के लिए बेहतरीन प्रदर्शन करने के लिए प्रेरित करती है। हरमनप्रीत कौर के अलावा स्मृति ही एकमात्र ऐसी महिला खिलाडी है। जिन्हें विदिशी क्रिकेट लीग में भी खेलने के लिए चुना गया है, चलिए अब हम स्मृति के कुछ शानदार रिकार्ड्स पर एक नजर डालते है। 

करियर रिकार्ड्स तथा व्यक्तिगत उपलब्धिया

स्मृति हमेशा ही से अपने खेल में सुधार की कोई गुंजाईश को छोडती ही नही है। वह अपने खेल को उस स्तर पर लेकर गयी है, जहा से वो अपने ही जैसी महिला क्रिकेटरों के लिए उदहारण बन सके।

उन्होंने अपने प्रदर्शन के दम पर कई सारे रिकार्ड और मान सम्मान हासिल किये है,

जो इस प्रकार है: 

  • स्मृति चौथी ऐसी महिला क्रिकेटर है, जिन्होंने शेफाली वर्मा के साथ मिलकर चौथे विकेट के लिए सबसे अधिक रनों की पार्टनरशिप की है। 
  • स्मृति के नाम एक टेस्ट सीरिज में सबसे अधिम 911 रन बनाने का रिकोर्ड है। 
  • उन्होंने वनडे में एक सीरिज में सबसे अधिक शतक लगाने का रिकोर्ड भी अपने नाम किया है। 
  • एक केलेंडर वर्ष में स्मृति ने सबसे अधिक 622 रन बनाने का रिकार्ड भी अपने नाम किया है। 
  • वर्ष 2016 में स्मृति को ICC Women’s Team of the Year के अवार्ड से सम्मानित किया गया है। 
  • स्मृति को बेहतरीन प्रदर्शन के लिए वर्ष 2017 में Youth Sports Icon Excellence अवार्ड दिया गया है। 
  • वर्ष 2018 में स्मृति को Women’s ODI Player of the Year का अवार्ड भी दिया जा चुका है। 
  • स्मृति मंधाना को उनके अच्छे प्रदर्शन के लिए वर्ष 2019 में अर्जुन अवार्ड से भी सम्मानित किया गया है। 

इन सभी मान – सम्मान के साथ साथ स्मृति को वर्ष 2020 में स्पोर्ट्सवीमेन ऑफ़ द ईयर का अवार्ड भी मिल चुका है। हालाँकि हम स्मृति के प्रदर्शन और उनके टेलेंट को उनको मिलने वाले अवार्ड्स से नही आंक सकते है। स्मृति महिला क्रिकेट में वर्तमान में सबसे बेहतरीन खिलाडी है, जो भारतीय महिला क्रिकेट को बहुत आगे लेकर जा रही है। 

 

स्मृति मंधाना का निजी जीवन

हम आपकी जानकारी के लिए बता दे की वर्तमान में स्मृति ने अभी अपने निजी जीवन के बारे में किसी भी तरह की जानकारी नही दी है। हालाँकि जल्द ही हमें उनके निजी जीवन के बारे में जानने को मिलेगा। लेकिन वर्तमान समय में स्मृति के निजी जीवन के बारे में कोई ख़ास जानकारी नही है। स्मृति ने सांगली महाराष्ट्र में अपने नाम से याने की SM 18 नाम से एक कैफे भी खोला है। 

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निष्कर्ष

जिस तरह से स्मृति ने अपने खेल से अपने देश और अपने माता – पिता का नाम रौशन किया है। उसी तरह से देश की हर लड़की में कुछ भी कर गुजरने का हौसला होता है। लेकिन अक्सर देश की बेटियों का कुछ कर गुजरने का हौसला उनको न मिलने वाले अवसरों की भेंट चढ़ जाता है। इसलिए हमें देश के सच्चे नागरिक होने के नाते इस जिम्मेदारी को निभाना चाहिए की सभी को समान रूप से अवसर प्राप्त हो, जिससे की वह अपने जीवन में सपनो को साकार कर सके। 

हमे पूरी उम्मीद है की आपको स्मृति मंधाना का जीवन परिचय अवश्य ही पसंद आया है। आप इस आर्टिकल को अपने उन बहनों के साथ भी अवश्य साझा करे जो जीवन में बहुत आगे जाना चाहती है। लेकिन अवसरों की कमी को वजह से आगे नही बढ़ पाती है। स्मृति मंधाना की बायोग्राफी से उन्हें प्रेरणा अवश्य ही मिलेगी। 

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