पी. वी. सिन्धु जीवनी ( बचपन, करियर, संघर्ष, कमाई, रिकार्ड्स )

इस आर्टिकल में हम पी. वी. सिन्धु की सफलता की कहानी के बारे में जानेंगे और साथ ही हम बायोग्राफी को भी जानेंगे। 

यदि आपके भीतर कुछ कर गुजरने का जज्बा हो तब इससे बिलकुल भी फर्क नही पड़ता है की आप एक महिला है अथवा एक पुरुष है। क्योकि सफलता तो सिर्फ इच्छाशक्ति और मेहनत की मेहताज होती है। बहुत कम ही लोग होते है जो उन सभी मानसिक बाधाओं को पार करते हुए अपने जीवन में कुछ ऐसा कर जाते है। जो उनके ही जैसे लांखो लोगो को अपने जीवन में बेहतरीन करने के लिए प्रेरित करता है। 

इस आर्टिकल में हम एक ऐसी ही महिला खिलाडी के बारे में जानेंगे। जिन्होंने अपने जीवन में आने वाली तमाम मुश्किलों को पार करते हुए सफलता हासिल की है और आज वो अपनी ही जैसी लांखो लडकियों को अपने सपने पूरे करने और अपनी शर्त पर जिन्दगी को जीने के लिए प्रेरित करती है।

पी. वी. सिन्धु बायोग्राफी

1 Full Name Pusarla Venkata Sindhu
2 Birth Date 5 July, ( 1995 )
3 Birth Place Hyderabad, India
4 Father / Mother P. V. Ramana / P. Vijaya
5 Educational Qualification Schooling At St. Ann’s College for Women, Hyderabad. 
6 Height 179 cm ( 5’10” )
7 Wieght 65 Kg’s
8 Relationship Status Unmarried 
9 Net Worth 44 Cr. ( $6 Million )
10 Nationality Indian

पी. वी. सिन्धु बचपन तथा परिवार

बैडमिंटन खेल की विश्वप्रसिद्ध खिलाडी पी. वी. सिन्धु का जन्म 5  जुलाई, 1995 में हैदराबाद में हुआ था। पिता का नाम पी. वी. रमण और इनकी माँ का नाम पी विजया है। वैसे इनके पिता पूर्व बालीबाल खिलाडी रह चुके है। 

इन्हें बालीबाल के खेल में अपने उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार से अर्जुन पुरस्कार मिल चुका है, वैसे पी. वी. सिन्धु के पिता भी एक अच्छे बालीबाल खिलाडी थे। लेकिन सिन्धु ने वर्ष 2001 में जब पुलेला गोपीचंद को बैडमिंटन खेलते हुए देखा और उनके बारे में सुना तब बचपन में ही उन्होंने बैडमिंटन में ही आगे बढने और अपना करियर बनाने का सोच लिया था।  

शिक्षा तथा शुरूआती जीवन

चूँकि पी. वी. सिन्धु के माता – पिता दोनों ही पेशे से बालीबाल खिलाड़ी थे, परन्तु सिन्धु जी तो बैडमिंटन के बेहतरीन खिलाडी पुलेला गोपीचंद से प्रभावित थी। बचपन से ही इनको बैडमिंटन के खेल में काफी गहरी रूचि आने लगी थी। जिसके बाद परिवार ने भी इनकी बैडमिंटन की रूचि को देखते हुए, आगे बढने के लिए प्रेरित किया।

इन्होने मात्र 8 वर्ष की उम्र में ही बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था। 

शुरुआत में तो इन्होंने सिकंदराबाद स्थित इंडियन रेलवे बैडमिंटन कोर्ट में अपने प्रथम कोच महबूब अली की देखरेख में उन्होंने बैडमिंटन के खेल को बारीकी से समझा। जिसके बाद पी. वी. सिन्धु ने बैडमिंटन को और भी बेहतर तरीके से सीखने और इस खेल में आगे बढने के लिए पुलेला गोपीचंद की बैडमिंटन अकेडमी में शामिल हुई। चूँकि इन्होंने पुलेला गोपीचंद से प्रेरित होकर ही बैडमिंटन में करियर बनाने का निश्चय किया था। इसलिए पी. वी. सिन्धु के लिए पुलेला गोपीचंद की एकेडमी में बैडमिंटन की ट्रेनिंग लेना गर्व की बात थी। हालाँकि पी. वी. सिन्धु ने खेल के साथ – साथ पढाई पर भी ध्यान देते हुए मेहदीपट्टनम से इंटरमीडिएट की परीक्षा उत्तीर्ण की थी।

चलिए अब करियर और उनकी सफलता के बारे में जानते है। 

पी. वी. सिन्धु का करियर संघर्ष तथा सफलता

शुरुआत से ही पुलेला गोपीचंद की बैडमिंटन की अकेडमी में ट्रेनिंग करने की वजह से पी. वी. सिन्धु का खेल बहुत बेहतर हो गया था। जिला स्तर पर होने वाले कई सारी स्पर्धाओ में हिस्सा लिया और वहा भी उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए कई सारी स्पर्धाए जीती। चलिए जानते है की किस तरह से सिन्धु ने अपने करियर में एक के बाद एक नए नए मुकाम हासिल किये और सफलता प्राप्त की। 

पी. वी. सिन्धु के करियर में टर्निंग पॉइंट तब आया जब, उन्होंने 2009 में कोलम्बो में आयोजित सब जूनियर एशियाई बैडमिंटन चैंपियनशिप में हिस्सा लिया। इस स्पर्धा में  सिन्धु  ने कांस्य पदक जीता था। 

कुछ तथ्य

  • इसके पश्चात पी. वी. सिन्धु ने वर्ष 2010 में ईरान फज्र इंटरनेशनल बैडमिंटन चैलेंज के एकल वर्ग में बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए सिल्वर मैडल जीता था। 
  • इसके बाद 7 जुलाई 2012 को वे एशिया यूथ अंडर-19 चैम्पियनशिप के फाइनल में जापानी खिलाड़ी नोजोमी ओकुहरा के खिलाफ बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए 18-21, 21-17, 22-20 से हराया।

यह दौर पी. वी. सिन्धु के करियर का वह दौर था जब वह अपने करियर को बस शुरू ही कर रही थी। लेकिन उन्होंने अपने करियर की शुरुआत में उनसे अच्छी वरीयता प्राप्त खिलाडियों को हराकर सभी को अपनी काबिलियत और टेलेंट की झलक बता दी थी। इसके बाद उन्होंने अपने खेल में और भी मेहनत करते हुए उसे बेहतरीन बनाया। जिसके बाद उन्होंने अपने बैडमिंटन करियर में और भी नई ऊंचाईयो को हासिल किया, जो की इस प्रकार से है। 

  • वर्ष 2016 के रियो ओलिंपिक के सेमी फाइनल मुकाबले में सिंधु ने जापान की नोज़ोमी ओकुहारा को सीधे सेटों में 21-19 और 21-10 से हराया।
  • इसके बाद रियो ओलिंपिक के तीसरी गेम में पी. वी. सिन्धु ने 21-15 के स्कोर से अच्छा खेल दिखाया, लेकिनअंत में उन्हें रजत पदक से संतोष करना पड़ा।
  • वर्ष 2020 के टोक्यो ओलिंपिक में चीन की जियाओ बिंग हे के खिलाफ्फ़ बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए उन्हें केवल 52 मिनट में 21-13, 21-15 से हराया और ब्रोंज़ मैडल अपने नाम किया था। 

 

अचीवमेंट्स

  • वर्ष 2015 में पी. वी. सिन्धु को बैडमिंटन खेल में उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए पद्म श्री अवार्ड से सम्मानित किया गया है। 
  • इसके बाद वर्ष 2016 में सिन्धु को मेजर ध्यान चंद खेल रत्न अवार्ड से भी सम्मानित किया गया है। 
  • वर्ष 2020 में इनको पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है, जो की भारत के किसी भी नागरिक को मिलने वाला तीसरा सर्वोच्च पुरूस्कार है। 
  • ओलिंपिक में बेहतरीन प्रदर्शन करने के लियी सिन्धु को BYJU’S की ओर से ₹10 million (US$130,000) की राशि पुरस्कार स्वरुप दी गयी थी। 
  • इसके बाद पी. वी. सिन्धु को उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए भारत सरकार से ₹3 million (US$40,000) की पुरस्कार राशि प्राप्त हुई थी। 

 

पी. वी. सिन्धु का निजी जीवन

ओलिंपिक में देश के लिए बेहतरीन प्रदर्शन करने के लिए पी. वी. सिन्धु को Bridgestone India का ब्रांड अम्बेसडर बनाया गया है। साथ ही सिन्धु को 2017 में Deputy Collectorके रूप में Andhra Pradesh में नियुक्त किया गया है।

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निष्कर्ष

पी. वी. सिन्धु प्रत्येक उस लड़की के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत है जो अपने जीवन में कुछ भी अलग करना चाहती है। क्योकि बाह्यत सी लडकियों को तो पर्याप्त संसाधन और अवसर न होने की वजह से अपने सपनो को छोड़ना पड़ता है। लेकिन सिन्धु जी उन सभी के लिए जीता – जागता उदहारण है की कैसे आगर जज्बा कुछ बड़ा करने का हो तो मुश्किलें भी आपका कुछ नही बिगाड़ सकती है। 

हम आशा करते है की आपको सिंधु जी पर लिखा गया यह आर्टिकल आपको अवश्य ही पसंद आई है। 

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