पुष्पेंद्र कुल्श्रेठ जी का सम्पूर्ण जीवन परिचय हिंदी में

प्रस्तुत लेख में पुष्पेंद्र कुल्श्रेठ जी का जीवन परिचय है। यह कुशल प्रवक्ता , पत्रकार तथा विद्वान बुद्धिजीवियों में जाने जाते हैं।

इनका वक्तव्य सुनने के लिए लोग दूर-दूर से इनके पास आया करते हैं।

वर्तमान समय में यह हिंदू समाज की वकालत करते हैं अर्थात उसके विचार रखते हैं तथा धर्म के नाम पर स्वार्थ सिद्ध करने वाले लोगों के चेहरे बेनकाब करते हैं।

पुष्पेंद्र कुल्श्रेठ जीवन परिचय

नाम पुष्पेंद्र कुल्श्रेठ
जन्म 2 दिसम्बर 1960
स्थान अलीगढ़
पिता का नाम
माता का नाम
धर्म सनातन हिन्दू
वैवाहिक स्थिति विवाहित
पुत्र/संतान
शिक्षा
व्यवसाय प्रवक्ता , वरिष्ठ पत्रकार
रूचि का क्षेत्र पत्रकारिता , राष्ट्रीयता की रक्षा

 

पुष्पेंद्र कुल्श्रेठ जी का बचपन

इनका आरंभिक जीवन अलीगढ़ में बीता। उन्होंने आरंभिक शिक्षा भी वहीं से प्राप्त की।

अपने आरंभिक जीवन का परिचय बताते हुए कहा था – शिक्षा पद्धति उर्दू होने के कारण मुझे उर्दू का अध्ययन करना पड़ा। यह अध्ययन मेंने बखूबी मन लगाकर किया। ‘ इस वाक्य से स्पष्ट होता है कि उन्होंने मुस्लिम बहुल क्षेत्र तथा उस परिवेश में अपना जीवन यापन किया था।

पुष्पेंद्र कुल्श्रेठ जी की शिक्षा

जैसा कि हम जानते हैं पुष्पेंद्र जी का आरंभिक जीवन अलीगढ़ में बीता।

इन्होंने आरंभिक शिक्षा तो अपने क्षेत्रीय विद्यालयों से प्राप्त की। उच्च शिक्षा के लिए इन्होंने अलीगढ़ विश्वविद्यालय का रुख किया , जहां से उन्होंने उच्च शिक्षा हासिल की।

पुष्पेंद्र कुल्श्रेठ जी का सामाजिक रूचि

यह सर्वविदित है कि पुष्पेंद्र जी कुशल प्रवक्ता तथा वरिष्ठ पत्रकार रहे हैं। उन्होंने पत्रकार की भूमिका में देश ही नहीं अपितु विदेश में भी रहकर पत्रकारिता की है।

सरकार की ओर से यह पाकिस्तान में भी रहे और पत्रकार की भूमिका का निर्वाह किया।

पत्रकारिता एक ऐसा विषय है जहां समाज के साथ सीधा जोड़ने तथा संवाद करने का अवसर प्राप्त होता है।

सामाजिक रूचि का विकास इन्हें इन्हीं क्षेत्रों से प्राप्त हुई।

पत्रकारिता के साथ-साथ उन्होंने सामाजिक सरोकार से भी अपना नाता जोड़ा।

धीरे-धीरे यह नाता पत्रकारिता पर भारी पड़ता गया एक समय ऐसा आया जब इन्होंने पत्रकार की भूमिका से एक समाजसेवी बनने का निश्चय किया। आज इसी भूमिका में वह देश-विदेश भ्रमण करते हैं और सामाजिक जागरूकता का कार्य करते हैं। इनकी विद्वता और प्रखर वक्ता का प्रमाण हम इनके सम्मेलन में देख सकते हैं , इन्हें सुनने के लिए देश-विदेश से लोग आते हैं। इतना ही नहीं ऑनलाइन यूट्यूब आदि के माध्यम से वीडियो भी देखते हैं जो लाखों-करोड़ों व्यू अर्थात दर्शकों तक पहुंचता है।

धारा 370 के प्रति पुष्पेंद्र कुल्श्रेठ जी की राय

धारा 370 के घोर विरोधी रहे पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ जी सदैव इसे हटाने का समर्थन करते रहे।

इस धारा के कारण कश्मीर को विशेष अधिकार का दर्जा प्राप्त था , जिसके कारण कश्मीर भारत का अभिन्न अंग होते हुए भी स्वयं को स्वतंत्र मानने लगा था। भारत के संसाधनों पर वह अपना एकछत्र राज्य माना करता था। भारत की पूंजी और संसाधन का अपव्यय वहां के राजनेताओं ने करना आरंभ कर दिया था , कारण यही था धारा 370 .

यह एक ढाल की भांति कश्मीर तथा कश्मीरी लोगों के लिए कार्य करता था।

कोई भी नियम कानून जो भारत के अन्य राज्यों में लागू है वह कश्मीर में लागू नहीं होता।

यहां तक की 2005 में बने सर्व शिक्षा अभियान का कानून भी वहां लागू नहीं था।

अतः पुष्पेंद्र जी ने विभिन्न सम्मेलन किए और धारा 370 की वास्तविकता को उजागर किया। अंततोगत्वा 2014 में जीत कर आई बी.जे.पी सरकार ने धारा 370 को हटाया और कश्मीर को मिले विशेष राज्य का दर्जा समाप्त किया।

आर्टिकल 35 A

धारा 370 की भांति वह सदैव आर्टिकल 35A का विरोध करते रहे। यह अनुच्छेद कश्मीर को एक विशेष दर्जा और महत्व प्रदान करता था।

जो भारत के अन्य राज्यों के साथ अन्याय था।

इस अनुच्छेद के तहत कोई भी अन्य राज्य से आकर यहां का निवासी नहीं बन सकता था।

साथ ही वह यहां पर अपनी जमीन जायदाद भी नहीं बना सकता था।

इस अनुच्छेद में विभिन्न प्रकार की खामियां थी जो कश्मीर के लिए भी हानिकारक थी।

केंद्र की सरकार ने इसे हटाकर अन्य राज्यों की भांति कश्मीर को महत्व प्रदान किया।

भारत के इतिहास से खिलवाड़

भारत का इतिहास वैसा नहीं है जैसा हमें पढ़ाया जाता है। भारत आजादी के बाद कांग्रेस तथा वामपंथियों की विचारधारा से चलता रहा।

जितने भी राजनेता तथा स्वघोषित बुद्धिजीवी हुए वह सब इन्हीं दलों के थे।

इन लोगों ने स्वयं को इतिहासकार और बुद्धिजीवी बताकर ऐसे ऐसे इतिहास लिखे जो भारत के वास्तविक इतिहास से मेल नहीं खाता।

उदाहरण के लिए आप देख सकते हैं आज भी साधारण शब्दों में कह देते हैं –

जो जीता वह सिकंदर . ‘जबकि सिकंदर से चंद्रगुप्त मौर्य जीत चुके थे।

सिकंदर , चंद्रगुप्त तथा चाणक्य की रणनीति से हार मान कर वापस लौट गया था।

इस बात से भी स्पष्ट होता है कि हमारे इतिहास में वह सभी शामिल किया गया जो इनकी विचारधारा को बढ़ावा दे सकता था। इन सभी तथ्यों को पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने गहनता से अध्ययन कर लोगों के समक्ष रखा। आज लोग इतने जागरूक हुए हैं कि वह अपने इतिहास को जानने और समझने लगे हैं। उनके भावनाओं और इतिहास के साथ किस प्रकार का खेल खेला गया वह सभी उभर कर अब आ रहा है।

उन सभी विषयों को हमारे साहित्य और इतिहास से हटाया जा रहा है जिन्हें जोड़ दिया गया है।

जनसंख्या नियंत्रण पर विचार

पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ का स्पष्ट मानना है कि , भारत सरकार संविधान को निष्पक्ष होकर लागू करें। जो कानून एक व्यक्ति पर लागू होता है , वही कानून दूसरे व्यक्ति पर लागू होना चाहिए। किसी धर्म , समाज ,  पंथ , मजहब के लिए अलग-अलग कानून के व्यवस्था भारतीय संविधान का उल्लंघन करती है। वह बताते हैं भारतीय संविधान में 42वां संशोधन जनसंख्या नियंत्रण के लिए किया गया। किंतु सरकार अपने स्वार्थ और वोट बैंक की राजनीति से प्रेरित होकर उस संशोधन पर कोई ध्यान नहीं दे रही। भारत में रहते हुए जो लोग जिन्ना वाली आजादी की बात करते हैं , ऐसे लोगों को पुष्पेंद्र जिन्ना के पास भेजने की वकालत करते हैं। उन्हें जिन्ना के पास जाकर उसकी आजादी को समझना चाहिए। फिर आकर जिन्ना वाली आजादी की बात भारत में करना चाहिए।

जनसंख्या नियंत्रण के लिए विश्व भर में प्रयास किए जा रहे हैं।

नए-नए कानून लागू किए जा रहे हैं।  ऐसे में भारत के पड़ोसी राज्य भी जो पूर्ण रूप से इस्लामिक राष्ट्र कहलाते हैं , वहां भी दो से अधिक संतान उत्पत्ति को अवैध माना जाता है। भारत ही एक ऐसा राष्ट्र है जहां सरकार का कानून पक्षपातपूर्ण है। पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ कहते हैं एक पंचर लगाने वाला 18-20 बच्चे पैदा करे या हमें स्वीकार नहीं है। भारत में क्वांटिटी(संख्या) नहीं बल्कि क्वालिटी वाली जनसंख्या चाहिए। भारत में दो से अधिक संतानों पर प्रतिबंध लगना चाहिए।

बच्चे की ठीक प्रकार से परवरिश हो इसकी जिम्मेदारी परिवार पर लागू होनी चाहिए।

धर्म और मजहब के नाम पर जो अलग से कानून का पालन किया जा रहा है।

उन सभी को पूर्ण रूप से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।

वह जम्मू-कश्मीर की भी याद दिलाते हैं , जहां बहुसंख्यक होने पर उन लोगों ने अपना संविधान , ध्वज , विचार सभी अलग कर लिए थे। वह केवल भारत को आय का स्रोत मानने लग गए थे। स्वयं भारत से अलग समझने लग गए थे। सरकार के कठोर निर्णय धारा 370 और अनुच्छेद 35 को समाप्त करने के साहस से , आज कश्मीर भारत के सामान्य राज्यों की भांति हो गया है।

पुष्पेंद्र कुल्श्रेठ जी जिहाद को उजागर करते

जिहाद का विषय गहन चिंतन-मनन का विषय है। आज कुछ कट्टर विचारधारा को समर्थन करने वाले लोग इस जिहाद का बहुत प्रयोग करने लगे हैं।

सामाजिक , आर्थिक , धार्मिक , राजनीतिक यहां तक की जमीन-जायदाद में भी जिहाद शब्द का प्रयोग आम हो गया है। यह जिहाद को समझा जाए तो स्वयं के सिद्धांतों और विचारों को बढ़ावा देना दूसरों को गलत साबित करना है। इस जिहाद की पूर्ति के लिए वह किसी भी स्तर पर जा सकते हैं। इसके लिए वह समाज के विरुद्ध भी कार्य करते हैं। इस प्रकार के जिहाद को उजागर करने के लिए पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने सार्वजनिक मंच से लोगों को जागरूक किया और सतर्क रहने के लिए प्रेरित किया।

यह जिहाद कोई एक व्यक्ति या क्षेत्र की समस्या नहीं है यह आज वैश्विक समस्या बन गई है।

जिसका सामना आज संपन्न और शक्तिशाली राष्ट्र भी कर रहे हैं

इसका उदाहरण – फ्रांस , अमेरिका , रसिया आदि देशों से भी लिया जा सकता है।

इस जिहाद के कारण न जाने कितने कत्लेआम और दंगे आम दिन देखने को मिलते हैं।

भारत में भी इसका प्रचार-प्रसार जोरों से हो रहा है। ‘

दिनोंदिन इस प्रकार की गतिविधियां बढ़ती जा रही है।

इसके पीछे एक प्रमुख कारण धार्मिक कट्टर भावना है।

पुष्पेंद्र कुल्श्रेठ एक प्रखर वक्ता

निश्चित रूप से पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ एक प्रखर वक्ता हैं। उनमें पत्रकार के गुण तो विद्यमान है ही उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में काफी लंबे समय तक कार्य किया है।

उनकी वाणी स्पष्ट हो और सरल है जो मूल पर चोट करती है।

उनके इन्हीं विचारों को सुनने के लिए आज युवा ही नहीं हर उम्र के लोग प्रतीक्षा में रहते हैं।

उनके प्रशंसक उन्हें सम्मेलनों में तो सुनते ही हैं साथ ही ऑनलाइन माध्यम से भी उनके साथ निरंतर जुड़े रहते हैं। उनके गतिविधियों में स्वयं को जोड़ने का प्रयास करते हैं।

फिल्म जगत में जिहाद

जिहाद का विषय ऐसा है जो किसी भी क्षेत्र से अछूता नहीं रहा है। कट्टरपंथी लोग तथा धार्मिक कट्टरता को समर्थन करने वाले फिल्म जगत में सदियों से अपनी जड़े जमा रखे हैं।

इनकी जड़ें इतनी गहरी है कि इन्हें कोई आसानी से हिला नहीं सकता।

यह पूंजी से संपन्न है जो इनके मनमानी का एक प्रमुख कारण है।

यह फिल्म में जिहाद करते हैं।

एक समाज को ऊंचा दिखाते हैं , दूसरे समाज को नीचा उसके कमियों को उजागर करते हैं। जबकि दूसरे समाज में व्याप्त अनेकों कुरीतियों और कमियों को छुपाते हैं। कुल मिलाकर फिल्म जगत में पैसे के बदौलत यह जिहाद करते हैं। कितनी ही फिल्में आप देखेंगे जिसमें आपको इसके प्रमाण मिल जाएंगे। समझदार को इशारा काफी होता है , यह मानकर हम केवल आपको उन विषयों की ओर संकेत मात्र कर सकते हैं।  क्योंकि यह गंभीर विषय है हमारी यह भावना नहीं है कि हम किसी को उग्र करें।

फिल्म जगत से जुड़े जिहाद विषय पर पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ जी के सम्मेलन देख सकते हैं तथा ऑनलाइन यूट्यूब पर मौजूद वीडियो का भी अध्ययन कर सकते हैं। उन्होंने बारीकी से इस विषय को उजागर किया है हाल ही में आई आमिर खान की फिल्म पीके फिल्म जगत में जिहाद का एक जीता जागता उदाहरण है जो केवल एक धर्म को हासिये पर रखने का प्रयास है।

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निष्कर्ष

उपरोक्त माध्यम से हमने पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ के संपूर्ण जीवन पर प्रकाश डालने का प्रयास किया है। जिसमें उनके आरंभिक जीवन से लेकर वर्तमान की स्थिति तक को समाहित किया है।

उनके व्यक्तित्व का अध्ययन इस लेख के माध्यम से किया जा सकता है।

आज उनके समाज में योगदान को हम नकार नहीं सकते उनका पूर्णकालिक लक्ष्य मातृ समाज को जागरूक करना है। इसके लिए वह दिन रात संघर्ष करते रहते हैं। पुष्पेंद्र जी , आर एन शर्मा , जीडी बक्शी जैसे लोग समाज के लोगों को जागरूक करने तथा उनके साथ हो रहे अन्याय के खिलाफ खड़े नजर आते हैं। आशा है यह लेख आपको पसंद आया हो , जिसके माध्यम से आप पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ जी के जीवन को लगभग संक्षिप्त रूप से जान सके होंगे।

आगे इस लेख का विस्तार समय समय पर किया जाएगा।

यह सभी साक्ष्य उनके सम्मेलन , वीडियो , लेख तथा व्यक्तिगत मुलाकात की स्मृतियों के आधार पर है।

किसी भी त्रुटि या सुधार की संभावना सदैव होगी इसके लिए आप हमें संकेत कर सकते हैं।

1 thought on “पुष्पेंद्र कुल्श्रेठ जी का सम्पूर्ण जीवन परिचय हिंदी में”

  1. बहुत उपयोगी लेख है। आज पुष्पेन्द्र जी की प्रासंगिकता बहुत बढ गयी है। उनके तर्क और विचार अकाट्य हैं।

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